हम यहां सफलता के कुछ अनोखे तरीके लिख रहे हैं। इन तरीकों को सब जानते हैं, पर बिरले ही उपयोग में लाते हैं। इसलिये इन्हें हम फिर से लिख रहे है।
हम सबने देखा है कि अक्सर ऐसे लोग जीवन में आगे बढ़ जाते हैं जो सबसे बुद्धिमान नहीं होते, कभी-कभी वे सबसे अधिक मेहनती भी नहीं होते, लेकिन उनमें एक विशेषता होती है कि वे सीखने की मशीन होते हैं। ऐसे लोग हर रात सोने से पहले सुबह उठने की तुलना में थोड़ा अधिक समझदार हो जाते हैं, और वाकई यह उनके लिये बहुत मददगार होता है, खासकर तब जब सामने जिंदगी का एक लंबा सफर हो।
हमें अपने हर दिन को पिछले दिन से थोड़ा अधिक जानने के अवसर के रूप में लेना चाहिए। यह दीर्घकालिक सफलता का सबसे विश्वसनीय तरीका है।
हमें कभी ऐसा ज्ञानी व्यक्ति नहीं मिलेगा जो व्यापक विषय क्षेत्र में पारंगत हो और लगातार पढ़ता न हो। हर बड़ा व्यक्ति अपने पास एक सूची रखता है जिसमें वह अपने अंदर सुधार करने वाली बातों और आदतों को लिखता रहता है।
जीवन वही अच्छा माना जाता है जो सार्थक जीवन जीने का लक्ष्य रखे, न कि केवल धनवान बनकर मरने का। साल बीतते जाते हैं, और आखिरी साल भी आ ही जाता है। सार्थक जीवन वह होता है कि जब आखिरी साल का आखिरी दिन आये तो यह कहने की हिम्मत हो कि हमने उपयोगी जीवन जिया।
धन जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पर केवल धन-संचय करना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए। धन से प्राप्त स्वतंत्रता का हम कैसे उपयोग करते हैं, यही हमारी विरासत होनी चाहिए।
कॅरियर और आर्थिक आधार बनाने की चाह रखने वालों के लिए, यह स्वयं से परखना जरूरी है कि हम जो जीवन बना रहे हैं, क्या वह अंत में सार्थक होगा?
बौद्धिक विनम्रता का अपने अंदर अभ्यास करना एक आवश्यक गुण है। विषम परिस्थितियों में तो इसकी जरूरत और अधिक हो जाती है। अगर अभ्यास सही तरीके से किया गया है तो कठिन समय में भी हम विनम्र अवश्य रह पायेंगे।
सही समय पर अपने घटिया विचारों को तुरंत नष्ट कर देना सबसे मूल्यवान गुणों में से एक होता है। बातें सुनते और निर्णय लेते समय हमें दूसरे पक्ष के तर्कों पर भी विचार करने के लिए खुद को बाध्य करना चाहिए।
हमें अपनी बोलचाल की भाषा में निरपेक्ष रूप से कुछ नहीं कहना चाहिए। हमें अपने भाषण से निश्चित रूप से और निस्संदेह जैसे शब्दों को हटा देना चाहिए। उनकी जगह ऐसे सौम्य शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो वास्तविक संवाद को रोकने के बजाय उसे प्रोत्साहित करते हों। इससे हमें अपनी बात मनवाने में कामयाबी मिलती है क्योंकि हम ही सही हैं, यह ज़िद खत्म हो गयी रहती है।
हमें कर्ज और अत्यधिक खर्च के खतरे को समय रहते समझ जाना चाहिये। एक बार कर्ज में डूब जाने के बाद उससे निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है। क्रेडिट कार्ड का कर्ज लंबे समय तक नहीं चलने देना चाहिये। सच्चाई यही है कि ब्याज चुकाते हुए हम तरक्की नहीं कर सकते हैं। ऋण चुकाने में लगाया गया प्रत्येक पैसा वह है, जिसका उपयोग हम कुछ भी बनाने के लिए नहीं कर सकते हैं।
हमें ईर्ष्या के प्रति भी सचेत रहना चाहिए। किसी दूसरे को तेजी से अमीर होते देखना और उसकी बराबरी करने की कोशिश करना नुकसान दायक होता है। यह कुछ उन पापों में से एक है जिनसे कोई आनंद नहीं मिलता। इस तुलना में वास्तव में पीड़ा होती है और इस प्रक्रिया में कोई लाभ नहीं मिलता है।
खुद के धनी बनने का साधारण उपाय है कि खर्च से अधिक हम कमाएँ और ऐसी चीजों के लिए उधार लेने से बचें जिनका मूल्य नहीं बढ़ता है।
समस्यायें आती हैं और वे सभी की सभी हल होने का इंतजार भी करती हैं, बस जरूरत होती है कि हम इन समस्याओं में कितनी जटिलता समझते हैं। समस्याओं को हल करने के लिए एक सबसे अच्छी विधि है: व्युत्क्रम विधि यानि उल्टा सोचने की विधि।
यह विधि कहती है कि उल्टा करो, हमेशा उल्टा करो। इसका मतलब यह है कि हमें किसी भी स्थिति या समस्या को उलट-पुलट कर देखना है। उसे उल्टे नजरिए से देखना है। वह समस्या क्या नहीं करने से आयी है, यह सोचना है। क्या करने से आयी है, यह नहीं सोचना है।
हमें भूलना नहीं चाहिये कि हमेशा केवल सद्गुणों से ही बात नहीं बनती है। हमेशा अच्छाई से ही काम नहीं चलता है। समाज में हर तरह के लोग होते हैं। तमाम तरह की उनकी आदतें होती हैं। जब हम सबको समझ जाते हैं तब हम आगे बढ़ पाते हैं।
हमें अपने आसपास के लोगों के जीवन में विनाशकारी व्यवहारों की सूची बनानी चाहिए। अत्यधिक शराब पीना, दूसरों के प्रति हमेशा अविश्वास का भाव रखना, बुरी संगति वालों के साथ रहना, लापरवाही से खर्च करना आदि कुछ बातें इस सूची में हो सकती हैं। हमें इन्हें कम नहीं करना है, पूरी तरह से समाप्त कर देना है।
उल्टा करने का मतलब यह है कि सफलता कैसे प्राप्त करें, यह पूछने के बजाय, हमें पूछना चाहिए कि असफलता की गारंटी क्या है। फिर उसका ठीक उल्टा करना चाहिए। यह अभ्यास स्पष्ट और व्यावहारिक होना चाहिये। इसमें कोई समझौता नहीं करना चाहिये।
एक अच्छा प्रयोग कुछ इस प्रकार किया जा सकता है। हम अच्छे निर्णय लेने की क्षमता को ज्यादातर बुरे निर्णयों के उदाहरणों को इकट्ठा करके और फिर ऐसे परिणामों से बचने के तरीकों पर विचार करके हासिल कर सकते हैं।
क्या यह सही नहीं है कि हम मूर्खता का अध्ययन करके और उससे बचने की पूरी कोशिश करके ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं?
इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह अहंकार को पूरी तरह से खत्म कर देता है। इस विधि में हम अपनी बुद्धिमत्ता साबित करने की कोशिश नहीं कर रहे होते हैं। हम उन प्रवृत्तियों को पहचानने की कोशिश कर रहे होते हैं जो निश्चित रूप से विनाश का कारण बनती हैं और एक ऐसा जीवन बना रहे होते हैं जो उनसे पूरी तरह से दूर रहे।
हमें याद रखना चाहिये कि हम सफल व्यक्तियों को देखकर उतना नहीं सीख पाते जितना असफल व्यक्तियों को देखकर सीख पाते हैं। ऐसा करने से सफलता को हमारी अनुशासित आदत बनने में देर नहीं लगती है।
थामस अल्वा एडिसन जब बिजली का बल्ब बनाते हुये लगातार असफल रहने के बाद, एक दिन बल्ब बनाने में सफल हो गये तब किसी पत्रकार ने उनसे पूछा कि आप एक हजार बार असफल होने के बाद कैसा महसूस करते हैं?
थामस अल्वा एडिसन का उत्तर हम सबके लिये आज भी प्रेरक है। उन्होंने कहा कि मैंने एक हजार बार असफलता का सामना नहीं किया है। मैंने बल्ब के आविष्कार में लगने वाले ऐसे एक हजार तरीके खोजे हैं जो काम नहीं करते हैं।
चलिये, भूलों से सबक लें और आगे बढ़ें!